*नीमच। जुर्म की दुनिया मे बेतहाशा अपने पैर जमाये मंदसौर का जब भी जिक्र सामने आता है, किसी न किसी बड़े हादसे की आहट उसमे जरूर शामिल होती हैं। मालवा बेल्ट में एक मात्र मंदसौर अब एक ऐसा जिला बन चुका है जहाँ सरे आम जुर्म बेखोफ पनप रहा है। चाहे बात लूट, डकैती की हो या सरेआम हत्याओं की मंदसौर की गूंज पूरे प्रदेश में गूंज उठी है। यहाँ की आवाम अब डरी सहमी ओर खोफजदा होने के साथ साथ मंदसौर की फिजा में जो देहशदगर्दी फैली है उससे मंदसौर सहम उठा है। पल भर के लिए किसी ने सोचा भी नही था कि मंदसौर में ऐसी भी दुखद घटना का सामना करना पड़ सकता है। जो शख्स मंदसौर का मसीहा माना जाता था वो अचानक यू अलविदा हो गया। एक सदमा, एक ठेस जो महसूस हुई वो बयां तो नही की जा सकती, लेकिन जिस कदर बीच चौराहे, भरे बाजार हत्यारे ने साजिश को अंजाम देकर मंदसौर नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की माथे पर गोली दाग कर जान ली है वो जिले को शर्मसार कर देने वाली घटना से कम नही है।*

*मंदसौर में भाजपा के कद्दावर नेता और नगरपालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की निर्मम हत्या के बाद अंचल में शोक की लहर है, शहर में मातम का माहौल है,, और हर कोई मंदसौर के हालातों पर रोते हुए चिंतन करने में लगा है, इस बीच कुछ छुटभैये नेता मंदसौर में उपजे हालतों को लेकर आरोपी की गिरफ्तारी से पहले वर्तमान सरकार को कोसने से भी नही चुके.... और ऐसे ही खोखले नेताओ की हवा तब निकल गयी जब भाजपा के इस वरिष्ठ और कद्दावर नेता की निर्मम हत्या का आरोपी भाजपा का ही एक गुंडा कार्यकर्ता निकला जिसने न केवल “प्रहलाद दादा“ की हत्या की बल्कि शहर के नागरिकों की भावनाओं को भी भाजपा के ही गुंडे ने मारा है...*

*पुलिस की चौकसी के चलते प्रहलाद बंधवार का हत्यारा मनीष बैरागी गिरफ्त में तो आ गया.... लेकिन साथ ही यहाँ विचारणीय बात यह है, की आखिर अपने ही घर मे घात लागये बैठे तत्वों से कैसे निपटा जाए...!*

*बुलेट पर आया गुण्डा मनीष*

*नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार बिती शाम 7 बजे बीपीएल चौराहे पर थे, जहा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बताया गया है कि हमलावर कोई और नही बल्कि आस्तीन का सांप भाजपा नेता मनीष बैरागी है। मनीष पहले बंधवार से मिलने आया 2 मिनट बातचीत की फिर पैर छूने के बहाने पिस्टल निकालकर दो गोलियां बंधवार के माथे पर दाग दी ओर आनन-फानन में आरोपी मनीष घटनास्थल से फरार हो गया। जिसके पास एक बुलेट मोटर बाइक नम्बर सुआईयू 1834 थी जिसे रास्ते मे ही छोड़ गया। लिहाजा पुलिस छानबीन में बाइक किसी शामगढ निवासी सत्यनारायण की थी। पुलिस आरोपी की तलाश में कर रही थी। सूचना मिलते ही शहरभर में नाकाबंदी कर दी गई थी।*

*गुण्डे मनीष सहित 3 आरोपी हिरासत में*

*हत्यारे मनीष के साथ दो अन्य लोग भी इस पुरे षड़यंत्र में शामिल थी, जो दादा को मौत के घाट उतार कर फरार हो गए थे। हालांकि पुलिस ने चंद घंटो में मनीष के अलावा भूरा को भी हिरासत में लिया है। बताया जाता है कि भूरा को नपाध्यक्ष ने किसी जमीन को लेकर 45 लाख रूपए दिए थे, लेकिन भूरा जमीन नही दिला पा रहा था। नपाध्यक्ष बार-बार इन्ही रूपयो का तकादा कर रहे थे।*

*भाजपा का संरक्षण प्राप्त था गुण्डे को*

*भाजपा के कुछ कथित लोगो के संरक्षण मिलने से गुण्डा मनीष पहले भी कई संगीन अपरोधो को अंजाम दे चुका है। रिकॉर्ड खंगालने पर मालूम हुआ कि पहले ही 302, 307 के मामले मनीष बैरागी पर विचारधीन है। लेकिन भाजपा का मुखौटा पहने  दुकानदारी चलाने वाला गुण्डा मनीष आज पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया है। लेकिन दुख की बात यह है कि हत्यारे ने एक कद्दावर नेता को मौत के घाट उतार दिया है, जिससे भाजपा को एक साफ छवि वाले नेता की क्षति तो पहुंची है और साथ ही अपने ही पाले हुए गुण्डे का नकाब भी उतर कर सामने आ आया है।*

*जमीनी मामला या 5 लाख की मांग*

*नपाध्यक्ष  प्रहलाद बंधवार की मौत के पीछे सस्पेंस अभी भी बरकरार है। गुण्डा मनीष वैसे तो डोडाचुरा, अफीम तस्करी, गुण्डागर्दी जैसे मामलो में सुर्खियों मे रहना बताया गया है। मनीष  पिता मोहनलाल बैरागी हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, नारकोटिक्स के करीब आधा दर्जन से अधिक अपराध पंजीबध्द है। इधर प्रहलाद बंधवार की मौत के पीछे बताया जा रहा है कि मनीष गुण्डागर्दी के बलबुते  अध्यक्ष से उसके नाम नपा व शासन की अंकुर डिपार्टमेंट वाली जमीन आवंटित करवाना चाहता था। इसी बात को लेकर विवाद चल रहा था।* *अध्यक्ष के मना करने पर उन्हे मौत के घाट उतार दिया। वही यह बात भी सामने आई है कि मनीष ने चुनावी समय में बंधवार को 5 लाख रूपये बाजार से लाकर दिए थे और उसी 5 लाख का ब्याज वो पिछले काफी समय से दे रहा था। बंधवार ने पैसा देने से इंकार किया तो उन्हे मौत के घाट उतारने का प्लान बनाया। बिच बाजार में उन्हे गोली मार दी।*


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